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Thursday, November 9, 2017

Invitation to join global online meditation on Sunday, 12 November, 2017

Jai Shri Mataji!

Dear brothers and sisters,
With open hearts let us join to meditate together so that everything will be enjoyable and let this joy come out of the love and affection we have for each other and for our Guru, our Mother and the Creator. This joy can be only complete when we receive it every minute, every moment.

Date: 12th November 2017, Sunday, 4 pm to 7 pm (IndiaTime)
Log in Link:
Those who are outside India can find corresponding timing in their country/city by clicking on this link :

 "..I have seen some people, they have such bhakti, such devotion which is shraddha - it's higher than bhakti - that it becomes part and parcel of your being. It just envelops you completely. When you have that shraddha, it's very miraculous. It works so many miracles. It's true some people were cured only thinking of Me, is a fact. But that doesn't mean that they had the shraddha of that level, but that means that they have to develop shraddha.
Now, how to develop a shraddha, which is a natural light of the spirit? Because people are trying very hard to develop shraddha, but shraddha cannot be developed by mental activity, by any activity but meditation of silence. If you do the meditation, I've always told you to do meditation...”

Param Pujya Shri Mataji,  Guru Puja, Cabella, 23-7-2000
जय श्री माताजी !
रविवार, 12 नवम्बर 2017, विश्वव्यापी ऑनलाइन ध्यान क़े कार्यक्रम का सस्नेह आमन्त्रण
परम पूज्य श्री माताजी की असीम कृपा से, विश्वव्यापी ऑनलाइन ध्यान क़े कार्यक्रम में विश्व सहज सामूहिकता में जुड़ कर परम पूज्य श्री माताजी से तादात्म्य के आनंद को पाने के लिए सभी सहजी भाइयों व् बहनो को हार्दिक आमन्त्रण है l  
दिनाँक: 12 नवम्बर  2017, रविवार, समय: सायं 4 बजे से 7 बजे तक (भारतीय समयनुसार),
लॉग इन लिंक :
"... अनेक लोग कहते है हमने सब परमात्मा को समर्पण कर दिया है। किन्तु यह केवल मौखिक होता है,वास्तव में नहीं। समर्पण मौखिक क्रिया नहीं है। निर्विचारिता प्राप्त करने के लिए,जिसका अर्थ है आपका विचार करना बंद कर देना,आपको समर्पण करना पड़ता है। जब आपकी विचार क्रिया बंद हो जाती है तब आप मध्य में आ जाते है। मध्य में आते ही तुरंत आप निर्विचार चेतना में पहुँच जाते है अर्थात आप परमात्मा की शक्ति के साथ एकरूप हो जाते है और जब ऐसा होता है तब वह (परमात्मा) आपकी देख-रेख करता है। वह आपकी छोटी-छोटी बातों के विषय में सोचता है। यह आश्चर्यजनक है किन्तु आप करके तो देखे और आप देखेंगे कि आपका पहला रास्ता गलत था। 
-- परम पूज्य श्री माताजी –

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